DBMS Transaction || ACID Properties in Hindi



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DBMS Transaction in Hindi:-

Transaction, operations का समूह होता है जो कि केवल एक लॉजिकल ऑपरेशन की तरह deal with होता है।

उदाहरण के लिये:-जब हम अपने बैंक अकाउंट से पैसे निकालते है या बैंक अकाउंट में पैसे जमा करवाते है।

ACID Properties:-Transaction की चार residences होती है जिसे हम ACID Properties कहते है।
1:-A-Atomicity
2:-C-Consistency
3:-I-Isolation
4:-D-Durability

1:-Atomicity:- जब Transaction एक ही स्टेप में पूर्ण हो जाता है तब transaction atomic होता है।

2:-Consistency:- जब transaction होता है तो डेटाबेस एक state से दूसरे स्टेट में consistence होता है।

3:-Isolation:- जब दो या उससे अधिक transaction एक साथ execute होते है तो एक transaction दूसरे transaction को प्रभावित नही करता है।

4:-Durability:- जब एक transaction पूरी तरह से complete हो जाता है तो जो परिवर्तन होते है वह permanently सिस्टम में रहते है।
अर्थात transaction long lasting होना चाहिए।

Types of Transaction:-
Transaction दो प्रकार के होते है:-

1:-Implicit Transaction
2:-Explicit Transaction


1:-Implicit Transaction:-

 Implicit Transaction में, SQL डेटाबेस इंजन एक नए transaction को शुरू कर देता है जब वर्तमान Transaction dedicated या rollback होता है।

Implicit transaction को on या off करने के लिए इस स्टेटमेंट का प्रयोग करते है:-
【SET IMPLICIT_TRANSACTIONS ON/OFF 】

प्रत्येक transaction को give up करने के लिए COMMIT TRANSACTION या ROLLBACK TRANSACTION स्टेटमेंट का प्रयोग किया जाता है।


2:-Explicit Transaction:-

एक express transaction में दोनों beginning तथा ending transaction को स्पष्ट रूप से outline किया जाता है।
Explicit transaction को शुरू करने के लिए BEGIN TRANSACTION का प्रयोग करते है तथा transaction को कम्पलीट करने के लिए COMMIT TRANSACTION या ROLLBACK TRANSACTION का प्रयोग करते है।


Concurrency Control in Hindi:-

जब एक ही information पर एक ही समय में a couple of transactions executing होते हैं, तो यह transaction के end result को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उन transaction के execution के क्रम को बनाए रखना आवश्यक है। इसके अलावा, इसे transaction की ACID Property में बदलाव नहीं करना चाहिए।

transaction की concurrent access को बनाए रखने के लिए, दो protocol पेश किए गए हैं।


Lock Based Protocol: –

 Lock दूसरे शब्दों में है जिसे get right of entry to कहा जाता है। इस प्रकार के protocol में किसी भी transaction को processed नहीं किया जाएगा जब तक कि transaction को record पर Lock नहीं मिलता। इसका मतलब है कि कोई भी transaction तब तक records को पुनः retrieve या insert या replace या delete नहीं करेगा, जब तक उसे उस particular information तक पहुंच प्राप्त न हो जाए।

इन locks को मोटे तौर पर binary locks और shared / distinctive locks के रूप में labeled किया जाता है।

binary lock facts में या तो lock या liberate किया जा सकता है। इसमें केवल यही दो State होंगे। इसे पुनः प्राप्त करने या retrieve करने या replace करने या डेटा को delete या डेटा का उपयोग न करने के लिए liberate किया जा सकता है।

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