DBMS Keys in Hindi || Types Keys in DBMS


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1 . Primary Key 

प्राइमरी key एक candidate key हैं, किसी भी रिलेशनल database desk की primary key टेबल के प्रत्येक file को Uniquely identify करता हैं |


Primary key 2 प्रकार की होती हैं:-

1. Simple Primary key.
2.  Composite Primary key.

* Primary Key Unique होती हैं

* किसी भी टेबल में केवल एक Primary Key होती हैं
* ये single या multi column हो सकती हैं, multi column primary key को हम Composite Primary Key कहते हैं|

* Composite Primary Key में केवल अधिकतम 16 column होते हैं

यह null price को comprise नहीं करती हैं

2. Super key-

सुपर की एक या एक से अधिक key का समूह होता है, जो कि हमें एक टेबल में से रो(row) को पहचानने के लिए मदद करता है characteristic का वह सेट होता है जो एक टेबल के रिकॉर्ड को अद्वितीय रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. वही characteristic के सेट को कैंडिडेट की कहते हैं|
जैसे कि हम एक टेबल में एक column को प्राइमरी की की तरह चुन लेते हैं उसी तरह बहुत से column होते हैं जिनके द्वारा एक row को हम uniquely perceive कर सकते हैं.|


4.Alternate key-

एक टेबल में एक से अधिक कैंडिडेट की(candidate key) रहते हैं.उन कैंडिडेट कि मैं से बस एक ही को प्राइमरी की(number one key) की तरह इस्तेमाल किया जाता है और बाकी जो key बचे रहते हैं उन्हें change keyकहा जाता है | Alternate Key को सेकेंडरी की(secondary key) भी बोला जाता है|

5. Composite key-

जब हम डेटाबेस बनाते हैं तो एक टेबल में एक से अधिक column को प्राइमरी की(number one key) की तरह प्रयोग करते हैं उन्हें ही कंपोजिट की कहा जाता है| दूसरे तरीके से समझाऊं तो जब एक रो(Row)को हम एक column के माध्यम से नहीं पहचान पाएंगे तब हम एक से अधिक column का इस्तेमाल करके उस रो को पहचान लेंगे. उन्हीं column के समूहों को कैंडिडेट की कहा |

6. Foreign key-

टेबल के बीच में संबंध बनाने केलिए फॉरेन की(overseas key) का इस्तेमाल किया जाता है. जब एक टेबल का प्राइमरी की दूसरे टेबल में डाल दिया जाता है तब वही प्राइमरी कि वह दूसरे टेबल के लिए फॉरेन की बन जाता है. फॉरेन की के जरिए से ही हम दो टेबल के बीच में संबंध बना सकते हैं|

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